बालाघाट जिले के मेंहदीवाड़ा गांव में धान की फसल पर कीट और रोग का असर सामने आया है। सोमवार को खेतों के निरीक्षण के दौरान कृषि विस्तार अधिकारी ने माहों, तना छेदक और ब्लास्ट का प्रकोप पाया।

खेत से अतिरिक्त पानी निकालने की सलाह

फसल की स्थिति देखते हुए किसानों से खेत में पानी अधिक समय तक जमा नहीं रहने देने को कहा गया। उन्हें उचित जल निकासी सुनिश्चित करने और दिखाई दे रहे कीट व रोग के नियंत्रण के लिए जरूरी कृषि उपचार अपनाने की सलाह दी गई।

दवाओं के पैकेट और बोतलों की भी जांच

निरीक्षण के दौरान किसानों के घरों और खेतों में रखी कीटनाशक दवाओं के पैकेट व बोतलें भी देखी गईं। इसका उद्देश्य यह जांचना था कि धान की फसल के लिए उचित और अनुशंसित दवा इस्तेमाल की जा रही है या नहीं।

किसानों को बिना सलाह के रासायनिक दवा नहीं डालने और केवल अनुशंसित मात्रा का उपयोग करने की समझाइश दी गई। कृषि विभाग ने शुरुआती लक्षण दिखते ही अपने मैदानी अमले से संपर्क करने को कहा है।

छिड़काव में हवा की दिशा और सुरक्षा का ध्यान रखें

अधिकारी ने दवा का छिड़काव हवा की दिशा के अनुरूप करने की सलाह दी, ताकि उसके कण शरीर या चेहरे की ओर न आएं। इस दौरान चश्मा, मास्क और अन्य जरूरी सुरक्षा उपकरण पहनने को भी कहा गया।

तेज धूप के बजाय शाम के समय छिड़काव को अधिक उपयुक्त बताया गया। काम पूरा होने पर हाथ-पैर और शरीर अच्छी तरह साफ करने तथा स्नान करने की सलाह भी दी गई।

धान में कीट या रोग के शुरुआती संकेत दिखने पर किसान कृषि विभाग के मैदानी अमले से संपर्क कर सकते हैं। विभाग के अनुसार कीटनाशक और रोगनाशक का चुनाव विशेषज्ञ की सलाह के आधार पर ही किया जाना चाहिए।