बालाघाट जिले के ग्राम जानपुर में धान को रोग और कीटों से बचाने के लिए किसानों को स्थानीय सामग्री से प्राकृतिक घोल तैयार करने का तरीका सिखाया गया। कृषि सखियों ने किसानों के घर पर दसपर्णी अर्क और अग्निअस्त्र बनाकर इनके इस्तेमाल की जानकारी दी।
जनपद पंचायत बिरसा के अंतर्गत हुई इस गतिविधि में कृषक नंदलाल और दलवीर सिंह के घर कृषि सखी बिंदुलता टांडिया तथा मीना बघेल ने दोनों घोल तैयार किए। किसानों को तैयारी की प्रक्रिया के साथ धान की फसल में प्रयोग की विधि भी समझाई गई।
स्थानीय सामग्री से फसल सुरक्षा का विकल्प
उप संचालक कृषि फूलसिंह मालवीय के अनुसार किसानों को निमास्त्र, अग्निअस्त्र, दसपर्णी अर्क और जीवामृत जैसे प्राकृतिक उपाय अपनाने की सलाह दी जा रही है। इनका उद्देश्य स्थानीय स्तर पर उपलब्ध सामग्री से फसल सुरक्षा का विकल्प उपलब्ध कराना है।
गतिविधि के दौरान किसानों को रासायनिक उपायों पर निर्भरता घटाने और प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ने के लिए प्रेरित किया गया। यह जानकारी ऐसे समय दी गई है जब धान की फसल में रोग और कीट दिखाई दे रहे हैं।
नियमित निरीक्षण पर जोर
कृषि विभाग ने किसानों से फसल का नियमित निरीक्षण करने को कहा है। रोग या कीट की पहचान शुरुआती अवस्था में होने पर आवश्यक नियंत्रण उपाय अपनाने की सलाह भी दी गई है।
जानपुर के किसानों को दिए गए प्रदर्शन से वे घर पर प्राकृतिक घोल तैयार करने और धान की फसल में निर्धारित विधि से उनका उपयोग करने की प्रक्रिया समझ सकते हैं।

