प्रदेश के किसानों को उनकी कृषि उपज का उचित मूल्य दिलाने, मंडियों में कृषि उत्पादों के दाम गिरने की स्थिति में आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने तथा तिलहनी फसलों के उत्पादन को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से राज्य शासन द्वारा खरीफ वर्ष 2026 के लिए सोयाबीन भावांतर भुगतान योजना प्रारंभ की गई है। योजना के अंतर्गत पात्र किसानों को सोयाबीन के न्यूनतम समर्थन मूल्य एवं मॉडल विक्रय दर के अंतर की राशि नियमानुसार उनके बैंक खातों में सीधे अंतरित की जाएगी।
जिले के सोयाबीन उत्पादक किसानों को योजना का लाभ दिलाने के लिए 46 प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों (पैक्स) एवं 4 सहकारी विपणन संस्थाओं में पंजीयन केंद्र स्थापित किए गए हैं। इन केंद्रों पर किसानों का पंजीयन निःशुल्क किया जा रहा है। पंजीयन 03 अक्टूबर 2026 से प्रारंभ हो चुका है तथा अंतिम तिथि 17 अक्टूबर 2026 निर्धारित है। पंजीयन के पश्चात किसान को पंजीयन क्रमांक प्रदान किया जाएगा।
किसानों के लिए पंजीयन की व्यवस्था
किसानों की सुविधा के लिए पंजीयन प्रक्रिया को सहज एवं सुगम बनाया गया है। ग्राम पंचायत, जनपद पंचायत एवं तहसील कार्यालयों में स्थापित सुविधा केंद्रों तथा सहकारी समितियों एवं सहकारी विपणन संस्थाओं द्वारा संचालित पंजीयन केंद्रों पर निःशुल्क पंजीयन कराया जा सकता है। इसके अतिरिक्त एमपी ऑनलाइन कियोस्क, कॉमन सर्विस सेंटर, लोक सेवा केंद्र एवं निजी साइबर कैफे के माध्यम से सशुल्क पंजीयन की सुविधा उपलब्ध रहेगी। सशुल्क पंजीयन के लिए अधिकतम 50 रुपये प्रति पंजीयन शुल्क निर्धारित किया जा सकेगा।
सिकमी, बटाईदार, कोटवार एवं वन पट्टाधारी किसानों के पंजीयन की सुविधा केवल सहकारी समितियों एवं सहकारी विपणन संस्थाओं द्वारा संचालित पंजीयन केंद्रों पर उपलब्ध होगी। इस श्रेणी के किसानों का शत-प्रतिशत सत्यापन राजस्व विभाग द्वारा किया जाएगा।
पंजीयन के समय किसान को आधार कार्ड/समग्र आईडी, ऋण पुस्तिका, बैंक खाता पासबुक एवं मोबाइल नंबर उपलब्ध कराना होगा। भूमि संबंधी दस्तावेजों एवं किसान के आधार तथा अन्य फोटो पहचान पत्रों का परीक्षण कर आवश्यक रिकॉर्ड संधारित किया जाएगा।
योजना की पात्रता एवं भुगतान प्रक्रिया
योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए किसान का मध्यप्रदेश का मूल निवासी एवं योजना में पंजीकृत होना आवश्यक है। योजना का लाभ प्रदेश में उत्पादित सोयाबीन पर जिले की निर्धारित उत्पादकता सीमा तक दिया जाएगा। किसान को अपनी सोयाबीन उपज का विक्रय अधिसूचित कृषि उपज मंडी में करना होगा। विक्रय के बाद जारी अनुबंध पर्ची, तौल पर्ची एवं भुगतान संबंधी दस्तावेज सुरक्षित रखना आवश्यक होगा।
यदि अधिसूचित मंडी परिसर में किसान द्वारा बेची गई सोयाबीन की विक्रय दर न्यूनतम समर्थन मूल्य से अधिक अथवा उसके बराबर रहती है, तो भावांतर राशि देय नहीं होगी। न्यूनतम समर्थन मूल्य एवं मॉडल विक्रय दर के बीच अंतर की पात्र राशि विक्रय अवधि समाप्त होने के पश्चात नियमानुसार किसान के बैंक खाते में सीधे अंतरित की जाएगी।
किसान इन बातों का रखें विशेष ध्यान
भावांतर भुगतान योजना का लाभ केवल पंजीकृत किसानों को ही मिलेगा। किसान पंजीयन के बाद पावती एवं पंजीयन क्रमांक अवश्य प्राप्त करें तथा फसल विक्रय के समय अपना पंजीयन क्रमांक दर्ज कराएं। सोयाबीन का विक्रय अधिसूचित मंडी में ही किया जाना आवश्यक है और विक्रय के बाद संबंधित रसीद एवं दस्तावेज सुरक्षित रखें।
सौदा पत्रक के आधार पर बेची गई कृषि उपज योजना में मान्य नहीं होगी। किसान पंजीयन के दौरान पोर्टल पर अपनी सभी जानकारियां सही दर्ज कराएं। दर्ज जानकारी त्रुटिपूर्ण पाए जाने की स्थिति में नियमानुसार भुगतान प्रभावित हो सकता है।
जिला प्रशासन द्वारा जिले के सभी पात्र सोयाबीन उत्पादक किसानों से अपील की गई है कि वे 17 अक्टूबर 2026 तक अपना पंजीयन अनिवार्य रूप से कराएं और शासन की सोयाबीन भावांतर भुगतान योजना का लाभ प्राप्त करें। साथ ही योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार सुनिश्चित किया जा रहा है, ताकि जिले के अधिक से अधिक सोयाबीन उत्पादक किसानों तक योजना की जानकारी पहुंचे और पात्र किसान इसका लाभ प्राप्त कर सकें।
