मध्यप्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़कर ग्राम डोंगरमंडला की श्रीमती अनीता नरते ने अपने जीवन में उल्लेखनीय बदलाव लाया है। 12 वीं कक्षा तक शिक्षित अनीता आज आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर होने के साथ-साथ अपने परिवार की खुशहाली और ग्रामीण महिलाओं के सशक्तिकरण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
श्रीमती अनीता नरते 18 सितंबर 2014 को ‘ प्रभा आजीविका स्वयं सहायता समूह ’ से जुड़ीं। इसके साथ ही वे ‘ लक्ष्मी महिला आजीविका ग्राम संगठन ’ एवं ‘ माँ गौरी महिला संकुल स्तरीय संगठन ’ से भी सक्रिय रूप से जुड़ी हुई हैं। समूह से जुड़ने के बाद उन्होंने नियमित बचत की और आवश्यकता के समय समूह से ऋण प्राप्त कर विभिन्न आजीविका गतिविधियाँ प्रारंभ कीं।
समूह से प्राप्त ऋण का उपयोग करते हुए अनीता ने राइस मिल, किराना दुकान एवं कृषि आधारित मशरूम उत्पादन का कार्य प्रारंभ किया। इन गतिविधियों के सफल संचालन से वर्तमान में उन्हें लगभग 18 हजार रुपये प्रतिमाह की व्यक्तिगत आय प्राप्त हो रही है। आर्थिक स्थिति मजबूत होने से परिवार के जीवन स्तर में सुधार आया है। प्रधानमंत्री आवास योजना के माध्यम से उन्हें पक्का आवास भी प्राप्त हुआ। उनके पति को उद्यानिकी विभाग से बीज किट तथा कृषि विभाग से खाद-बीज का लाभ मिला।
परिवार पर संकट की घड़ी में भी स्वयं सहायता समूह उनके लिए मजबूत संबल बना। पति के अस्वस्थ होने पर अनीता ने समूह से ऋण लेकर उनका उपचार कराया। इस प्रकार समूह उनके लिए केवल बचत और ऋण का माध्यम नहीं, बल्कि आवश्यकता के समय आर्थिक सहारा भी बना।
अनीता ने अपने ग्राम के गरीब एवं अति-गरीब परिवारों को स्वयं सहायता समूहों से जोड़ने में सक्रिय भूमिका निभाई है। साथ ही वृक्षारोपण एवं अन्य सामाजिक गतिविधियों में भी वे सक्रिय सहभागिता निभाती हैं। उनकी आर्थिक आत्मनिर्भरता से बच्चों की शिक्षा में सुधार हुआ है तथा परिवार को समाज में सम्मान और नई पहचान मिली है। अनीता कहती है कि “ समूह से जुड़ने के बाद हमारी आर्थिक स्थिति में बदलाव आया।
अनीता नर्ते की कहानी यह संदेश देती है कि स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर ग्रामीण महिलाएं न केवल आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकती हैं, बल्कि अपने परिवार और समाज के विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकती हैं।
