पांढुर्णा जिले में इस बार खरीफ की बुवाई तय लक्ष्य से आगे निकल गई है। कलेक्टर सभाकक्ष में गुरुवार को हुई कृषि विकास विभाग की समीक्षा बैठक में बताया गया कि खरीफ वर्ष 2026 के लिए जिले में 83 हजार 95 हेक्टेयर का लक्ष्य रखा गया था, जबकि बोनी 84 हजार 823 हेक्टेयर में हुई। यह लक्ष्य का 102 प्रतिशत है। बैठक की अध्यक्षता कलेक्टर नीरज कुमार वशिष्ठ ने की।

बोए गए रकबे में मक्का, कपास, अरहर, सोयाबीन और मूंगफली सहित कई फसलें शामिल हैं। खाद की स्थिति पर बताया गया कि 22 सितंबर 2026 तक जिले में कुल 56 हजार 471 मीट्रिक टन उर्वरक उपलब्ध रहा, जिसमें से 28 हजार 590 मीट्रिक टन का वितरण किसानों को किया जा चुका है। बैठक में विभिन्न फसलों के बीज की उपलब्धता की जानकारी भी रखी गई।

फसल प्रदर्शन से खेत तक पहुंच रही नई तकनीक

बैठक में दलहनों में आत्मनिर्भरता, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा एवं पोषण मिशन, कपास उत्पादकता मिशन और राष्ट्रीय मिशन ऑन एडिबल ऑयल के तहत चल रही गतिविधियों की प्रगति देखी गई। इन योजनाओं में अरहर, मक्का, ज्वार, कपास, चना, सोयाबीन और मूंगफली के फसल प्रदर्शन लगाए जाते हैं, जिनके जरिए किसानों तक उन्नत कृषि तकनीक और आदान सामग्री पहुंचाई जाती है।

मूंगफली के फसल प्रदर्शन में पांढुर्णा और सौंसर, दोनों विकासखंडों के लिए 500-500 हेक्टेयर का लक्ष्य तय था, जो पूरा कर लिया गया है। इससे जिले के कुल 1,285 किसानों को लाभ मिला है। यह उन गिने-चुने घटकों में है, जिनमें लक्ष्य पूरी तरह हासिल हो चुका है।

सिंचाई और कृषि यंत्रों पर अनुदान की स्थिति

प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत किसानों को स्प्रिंकलर सेट, ड्रिप और मिनी स्प्रिंकलर के जरिए सिंचाई सुविधा दी जा रही है। आर.के.व्ही.वाई. (डी.पी.आर.) में स्प्रिंकलर सेट के चार लक्षित प्रकरणों में अभी लॉटरी प्रक्रिया होनी बाकी है। अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के किसानों के लिए चलाई जा रही नलकूप खनन योजना में तय चारों प्रकरण पूरे कर लिए गए हैं।

कृषि यंत्र किराये की दुकान (सीएचसी) योजना के तहत निजी कस्टम हायरिंग के छह प्रकरण फिलहाल प्रक्रियाधीन हैं। इस योजना में परियोजना लागत का 40 प्रतिशत और अधिकतम 10 लाख रुपये तक अनुदान देने का प्रावधान है। यानी किराये पर कृषि यंत्र चलाने का केंद्र खोलने के इच्छुक किसान इस सीमा तक सहायता ले सकते हैं।

प्राकृतिक खेती मिशन में क्लस्टर और कृषि सखियां

राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के तहत जिले के लिए 6 क्लस्टर, 750 किसान और 300 हेक्टेयर क्षेत्र का लक्ष्य तय किया गया है। इन छहों क्लस्टरों में कुल 12 कृषि सखियों का चयन हो चुका है और चार बायो इनपुट रिसोर्स सेंटर स्थापित किए जा रहे हैं। मिशन में पात्र किसानों को नियमानुसार प्रोत्साहन राशि के साथ प्रशिक्षण और सहयोग देने का प्रावधान है।

बैठक में कृषि आदान की गुणवत्ता जांचने के लिए किए गए निरीक्षण और नमूना परीक्षण की जानकारी भी दी गई। कलेक्टर ने अधिकारियों से कहा कि किसानों तक गुणवत्तापूर्ण खाद, बीज और कीटनाशक पहुंचें, योजनाओं के लक्ष्य पूरे हों और अनुदान का लाभ पात्र हितग्राहियों तक ही पहुंचे, यह सुनिश्चित किया जाए।

वर्षा की स्थिति को देखते हुए कलेक्टर ने कृषि, जल संसाधन और राजस्व विभाग को निर्देश दिए कि जिले के किसानों को कम पानी चाहने वाली फसलें लगाने के लिए प्रोत्साहित किया जाए। कृषि विभाग से कहा गया कि ऐसी फसलों के बीज का भंडारण किया जाए और इसका प्रचार-प्रसार भी हो। किसान अपने विकासखंड के कृषि कार्यालय से इन फसलों के बीज और अनुदान योजनाओं की जानकारी ले सकते हैं।

बैठक में अपर कलेक्टर ज्योति ठाकुर, संयुक्त कलेक्टर मेघा शर्मा और नेहा सोनी, अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) पांढुर्णा अलका एक्का, अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) सौंसर सिद्धार्थ पटेल तथा उप संचालक कृषि मोरिस नाथ सहित संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।